Brahmacharini-“ब्रह्मचारिणी” नवदुर्गा का दूसरा स्वरूप | कथा, श्लोक और महत्व जानें।

Brahmacharini Mata

नवदुर्गा मे ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी

ब्रह्मचारिणी माता श्लोक :

दधाना करपद्माभ्याम अक्षमालाकमण्डलू ।

देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ।

ब्रह्मचारिणी माता का स्वरूप:

ब्रह्मचारिणी माता देवी दुर्गा के नौ रूपों में से दूसरा रूप है। इनका स्वरूप अत्यंत सुंदर और दिव्य है। वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं, उनके बाल खुले हैं और वे एक कमंडल और एक जप माला धारण करती हैं। यह ज्ञान और शक्ति का प्रतीक है।

ब्रह्मचारिणी का अर्थ:

मां दुर्गा की नव शक्तियों का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। यहाँ ‘ब्रह्म’ शब्द का अर्थ तपस्या है। ब्रह्मचारिणी अर्थात् तप की चारिणी- तप का आचरण करने वाली।

कहा भी गया है – वेदस्तत्त्वं तपो ब्रह्म

वेद, तत्त्व और तप ‘ब्रह्म’ शब्द के अर्थ हैं। ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यन्त भव्य है। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बायें हाथ में कमण्डलु रहता है।

Brahmacharini Mata की कथा:

अपने पूर्वजन्म में जब ये हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न हुई थीं तब नारद के उपदेश से इन्होंने भगवान् शंकर को पति-रूप में प्राप्त करने के लिये अत्यन्त कठिन तपस्या की थी। इसी दुष्कर तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात् ब्रह्मचारिणी नामसे अभिहित किया गया।

एक हजार वर्ष उन्होंने केवल फल-मूल खाकर व्यतीत किये थे। सौ वर्षों तक केवल शाक पर निर्वाह किया था। कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखते हुए खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के भयानक कष्ट सहे ।

इस कठिन तपश्चर्या के पश्चात् तीन हजार वर्षों तक केवल जमीन पर टूटकर गिरे हुए बेलपत्रों को खाकर वह बिना रुके  भगवान् शंकर की आराधना करती रहीं।

इसके बाद उन्होंने सूखे बेलपत्रों को भी खाना छोड़ दिया। कई हजार वर्षों तक वह निर्जल और निराहार तपस्या करती रहीं। पत्तों को भी खाना छोड़ देने के कारण उनका एक नाम ‘अपर्णा’ भी पड़ गया।

कई हजार वर्षों की इस कठिन तपस्या के कारण ब्रह्मचारिणी देवी का वह पूर्वजन्म का शरीर एकदम क्षीण हो उठा। वह अत्यन्त ही दुर्बल हो गयी थीं।

उनकी यह दशा देखकर उनकी माता मेना अत्यन्त दुःखित हो उठीं। उन्होंने उन्हें उस कठिन तपस्या से जगाने के लिये आवाज दी ‘उमा’, अरे! नहीं, ओ! नहीं!’ तबसे देवी ब्रह्मचारिणी का पूर्वजन्म का एक नाम ‘उमा’ भी पड़ गया था।

उनकी इस तपस्या से तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ब्रह्मचारिणी देवी की इस तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताते हुए उनकी सराहना करने लगे।

अन्त में पितामह ब्रह्माजी ने आकाशवाणी के द्वारा उन्हें सम्बोधित करते हुए प्रसन्न स्वरों में कहा – ‘हे देवि ! आज तक किसी ने ऐसी कठोर तपस्या नहीं की थी। ऐसी तपस्या तुम्हीं से सम्भव थी। तुम्हारे इस अलौकिक कृत्य की चारो दिशाओं मे सराहना हो रही है। तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी। भगवान् शंकर तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तुम तपस्या छोडकर घर लौट जाओ। शीघ्र ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं।

अपने इसी कठिन तपोबल से माता ने अपने परम आराध्य भगवान शिव को प्राप्त कर लिया था।

ब्रह्मचारिणी माता का महत्व

ब्रह्मचारिणी माता की महिमा अपार है। वे भक्तों को आध्यात्मिक और सांसारिक दोनों तरह के लाभ प्रदान करती हैं। उनकी पूजा करने से भक्तों का जीवन सुखमय और सफल बनता है।

‘ माँ दुर्गाजी का यह दूसरा स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनन्त फल देनेवाला है। इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयमकी वृद्धि होती है। जीवन के कठिन संघर्षों में भी उसका मन कर्तव्य-पथ से विचलित नहीं होता।

ब्रह्मचारिणी माता तपस्या और ज्ञान की देवी हैं। 

माँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। दुर्गापूजा के दूसरे दिन इन्हीं के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन ‘स्वाधिष्ठान’ चक्र में स्थित होता है। इस चक्र में अवस्थित मन वाला योगी उनकी कृपा और भक्ति प्राप्त करता है।

Brahmacharini Mata की पूजा विधि

ब्रह्मचारिणी माता की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है। इस दिन भक्तगण मंदिरों में जाकर उनकी विधि-विधान से पूजा करते हैं। माता के श्लोक का जाप किया जाता है। घर पर भी उनकी पूजा की जा सकती है। पूजा में मां को सफेद रंग का फूल, सफेद मिठाई, और सफेद वस्त्र अर्पित किए जाते हैं।

Brahmacharini Mata की पूजा का महत्व

ब्रह्मचारिणी माता की पूजा करने से भक्तों को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है।
  • जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन कर्तव्य-पश्चसे विचलित नहीं होता।
  • माँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है।

निष्कर्ष:

ब्रह्मचारिणी माता हिन्दू धर्म की एक महत्वपूर्ण देवी हैं। उनकी पूजा से भक्तों को आध्यात्मिक और सांसारिक दोनों तरह के लाभ प्राप्त होते हैं।

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