दुर्गा माता की आरती-ॐ जय अम्बे गौरी-Durga Aarti Lyrics in hindi 2023

श्री दुर्गाजी की आरती (Maa Durga Aarti Lyrics)

माँ दुर्गा की पूजा के बाद उनकी आरती करना अत्यंत आवश्यक है। बिना आरती के पूजा पूर्ण नहीं होती है।

आरती के नियम : भक्त माता दुर्गा के समक्ष दीप या कपूर जलाकर हीं माता की आरती उतारें, आरती के दौरान जलाए जाने वाले दीपक की ज्योति से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार होता है। आरती करने के विशेष नियम इस लेख के अंत मे दिये गए हैं। लाभ उठाएँ।

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

तुमको निशि दिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवजी ॥

मांग सिंदूर विराजत टीको मृगमद को ।

उज्जवल से दोउ नैना चन्द्रबदन नीको ॥

ॐ जय अम्बे गौरी

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै ।

रक्तपुष्प की माला कंठन पर साजै ॥

ॐ जय अम्बे गौरी

केहरि वाहन राजत खड्ग खप्पर धारी ।

सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुखहारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी

कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती ।

कोटिक चन्द्र दिवाकर राजत सम ज्योति ॥

ॐ जय अम्बे गौरी

शुम्भ निशुम्भ बिडारे महिषासुर घाती ।

धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।

मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी ।

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी

चौसठ योगिनि मंगल गावत नृत्य करत भैरू ।

बाजत ताल मृदंगा अरु बाजत डमरू ॥

ॐ जय अम्बे गौरी

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता ।

भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता ॥

ॐ जय अम्बे गौरी

भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी।

मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती।

श्रीमालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति ॥

ॐ जय अम्बे गौरी

यह अंबाजी की आरती जो कोई नर गावै ।

कहत शिवानंद स्वामी सुख संपत्ति पावै ॥

ॐ जय अम्बे गौरी

नवरात्रि में दुर्गा जी की आरती करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है। नवरात्रि में माता दुर्गा की पूजा अर्चना का विशेष महत्व है, और आरती इस पूजा का एक अभिन्न अंग है। नवरात्रि में दुर्गा जी की आरती करने से भक्तों को माता दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और उन्हें सुख-समृद्धि, शांति और आनन्द की प्राप्ति होती है। दुर्गा चालीसा का पाठ भी अत्यंत लाभकारी है। 

आरती के दौरान ध्यान देने योग्य बातें :

  • भगवान की आरती हमेशा एक ही स्थान पर खड़े होकर, थोड़ा झुककर, चरणों में चार बार, नाभि पर दो बार, मुखमंडल पर एक बार और सभी अंगों पर सात बार घुमाकर की जाती है।
  • आरती के 14 चक्कर से चौदह भुवनों में भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • स्कंद पुराण के अनुसार, बिना मंत्र और पूजाविधि के भी श्रद्धापूर्वक आरती करने से पूजा स्वीकार हो जाती है।
  • पौराणिक कथाओं मे भगवान विष्णु के अनुसार, घी से आरती करने से स्वर्गलोक, कपूर से आरती करने से अनंत मे प्रवेश और आरती देखने से परमपद की प्राप्ति होती है।

विशेष सावधानियां

  • आरती करते समय दीपक कभी भी उल्टा नहीं होना चाहिए।
  • बिना पूजा या भजन के आरती नहीं की जाती।
  • आरती से ऊर्जा लेते समय सिर अवश्य ढक लेना चाहिए।
  • आरती लेने के बाद कम से कम पांच मिनट हाथ नहीं धोने चाहिए।

निष्कर्ष :

आरती एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है जो भक्तों को भगवान के प्रति अपनी भक्ति और श्रद्धा प्रकट करने का अवसर प्रदान करती है। आरती करते समय इन नियमों का पालन करने से पूजा को और अधिक प्रभावी और लाभदायक बनाया जा सकता है।

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